Friday, November 23, 2018

क्या होता है महायोग? व कैसे होते है महायोग में उतपन्न जातक? व क्यों फलित नही होता है महायोग?


क्या होता है महायोग? व कैसे होते है महायोग में उतपन्न जातक? व क्यों फलित नही होता है महायोग?


क्या होता है महायोग?
लग्न से प्रारम्भ कर द्धादश भाव पर्यन्त दो भावेशों में परस्पर व्यत्यय सम्बन्ध से कुल 66  योग बनते है| जिनमे से तृतीय, षष्ठ, अष्टम और बारहवें भाव के स्वामियों के योग के अतिरिक्त 28 योग महायोग कहलाते है|
(1) लग्नेश और दितीयेश में व्यत्यय
(2) लग्नेश और चतुर्थेश में व्यत्यय
(3) लग्नेश और पंचमेश में व्यत्यय
(4) लग्नेश और सप्तमेश में व्यत्यय
(5) लग्नेश और नवमेश में व्यत्यय
(6) लग्नेश और दशमेश में व्यत्यय
(7) लग्नेश और एकादशेश में व्यत्यय
(8) दितीयेश और चतुर्थेश में व्यत्यय
(9) दितीयेश और पंचमेश में व्यत्यय
(10) दितीयेश और सप्तमेश में व्यत्यय  
(11) दितीयेश और नवमेश में व्यत्यय
(12) दितीयेश और दशमेश में व्यत्यय  
(13) दितीयेश और एकादशेश में व्यत्यय
(14) चतुर्थेश और पंचमेश में व्यत्यय
(15) चतुर्थेश और सप्तमेश में व्यत्यय  
(16) चतुर्थेश और नवमेश में व्यत्यय
(17) चतुर्थेश और दशमेश में व्यत्यय  
(18) चतुर्थेश और एकादशेश में व्यत्यय
(19) पंचमेश और सप्तमेश में व्यत्यय
(20) पंचमेश और नवमेश में व्यत्यय
(21) पंचमेश और दशमेश में व्यत्यय
(22) पंचमेश और एकादशेश में व्यत्यय 
(23) सप्तमेश और नवमेश में व्यत्यय
(24) सप्तमेश और दशमेश में व्यत्यय  
(25) सप्तमेश और एकादशेश में व्यत्यय  
(26) नवमेश और दशमेश में व्यत्यय
(27) नवमेश और एकादशेश में व्यत्यय  
(28)  दशमेश और एकादशेश में व्यत्यय
इन 28 योगो को महायोग कहते है|
Maha-Yog
कैसे होते है महायोग में उतपन्न जातक?
महायोग में उतपन्न जातक पर स्थाई रूप से लक्ष्मी की कृपा होती है|
महायोग में उतपन्न जातक समूह के स्वामी होते है|
महायोग में उतपन्न जातक धन-धान्य से पूर्ण होते है|
महायोग में उतपन्न जातक सुन्दर वस्त्र-स्वर्णाभूषण से सम्पन्न होते है|
महायोग में उतपन्न जातक राजकृपा से सम्मानित होते है|
महायोग में उतपन्न जातक वाहन सुख प्राप्त करते है|

क्यों फलित नही होता है महायोग?
महायोग के प्रमुख कारक तृतीय, षष्ठ, अष्टम और बारहवें भाव के स्वामियों के योग के अतिरिक्त भाव वाले ग्रह होते है तो निम्न कारणों से महायोग अपना पूर्ण फल नही देगा—

यदि योग होने वाले भाव का स्वामी ग्रह बालावस्था, वृद्ध अवस्था या मृत अवस्था में हो तो भी जातक को महायोग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

योग होने वाले भाव सम्बन्ध बना हुआ यदि षष्ठ भाव या अष्टम भाव या व्यय भाव में हो तो भी जातक को महायोग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

मै आशा करता हू की आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी| आपको ये जानकारी कैसी लगी इसके बारे में हमें जरुर बताइयेगा| व आगे इसी तरह की ज्योतिष की जानकारी के लिए जुड़े रहिएगा..........

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Thursday, November 22, 2018

क्या होता है खल योग? व कैसे होते है खल योग में उतपन्न जातक? व क्यों फलित नही होता है खल योग?


क्या होता है खल योग? व कैसे होते है खल योग में उतपन्न जातक? व क्यों फलित नही होता है खल योग?

क्या होता है खल योग?
लग्न से प्रारम्भ कर द्वादश भाव पर्यन्त दो भावेशों में परस्पर व्यत्यय सम्बन्ध से कुल 66  योग बनते है| जिनमे से आठ योग तृतीयेश के योग से बनते है, इन्हें खल योग कहते है| तृतीय भाव से द्वादशेश, अष्टमेश, षष्ठेश एवं तृतीयेश के अतिरिक्त शेष भावेशो के साथ आठ प्रकार के सम्बन्ध होते है –
(1) तृतीयेश और लग्नेश में व्यत्यय
(2) तृतीयेश और द्वितीयेश में व्यत्यय
(3) तृतीयेश और चतुर्थेश में व्यत्यय
(4) तृतीयेश और पंचमेश में व्यत्यय
(5) तृतीयेश और सप्तमेश में व्यत्यय
(6) तृतीयेश और नवमेश में व्यत्यय
(7) तृतीयेश और दशमेश में व्यत्यय
(8) तृतीयेश और एकादशेश में व्यत्यय
इन 8 योगों को खल योग कहते है|

Khal-Yog

कैसे होते है खल योग में उतपन्न जातक?
खल योग में उतपन्न जातक व्यक्ति उद्धत स्वभाव का होता है|
खल योग में उतपन्न जातक कुमार्गगामी होते है|
खल योग में उतपन्न जातक करूष वाकू होते है|
खल योग में उतपन्न जातक द्रारीद्रय होते है|
खल योग में उतपन्न जातक पीड़ित होते है|
खल योग में उतपन्न जातक कभी सन्मार्ग का अनुसरण करने वाले होते है|
खल योग में उतपन्न जातक कभी मिष्टभाषी होते है|
खल योग में उतपन्न जातक कभी सौभाग्य का भोग करने वाला होता है|
तात्पर्य यह है कि खल योग में उत्पन्न व्यक्ति शुभाशुभ कर्मा का सम्मिश्रण होता है| अशुभ फल की अधिकता के कारण ही इसे खल योग कहते है |


क्यों फलित नही होता है खल योग?
खल योग के प्रमुख कारक तृतीयेश व जिसका सम्बन्ध तृतीयेश से होगा वही बनेगा तो निम्न कारणों से खल योग अपना पूर्ण फल नही देगा—

यदि तृतीय भाव का स्वामी ग्रह बालावस्था, वृद्ध अवस्था या मृत अवस्था में हो तो भी जातक को खल योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

तृतीयेश से जिस भाव का सम्बन्ध होगा वह ग्रह यदि बालावस्था, वृद्ध अवस्था या मृत अवस्था में हो तो भी जातक को खल योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

तृतीयेश के साथ सम्बन्ध बना हुआ यदि षष्ठ भाव या अष्टम भाव या व्यय भाव में हो तो भी जातक को खल योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|


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Wednesday, November 21, 2018

क्या होता है दैन्य योग? व कैसे होते है दैन्य योग में उतपन्न जातक? व क्यों फलित नही होता है दैन्य योग?


क्या होता है दैन्य योग? व कैसे होते है दैन्य योग में उतपन्न जातक? व क्यों फलित नही होता है दैन्य योग?

क्या होता है दैन्य योग?
लग्न से प्रारम्भ कर द्वादश भाव पर्यन्त दो भावेशों में परस्पर व्यत्यय सम्बन्ध से कुल 66  योग बनते है| इसमें 30 योग षष्ठ या अष्टम या बारहवें भाव के स्वामियों के योग से उत्पन्न होते है| इनको दैन्य योग कहते है|

षष्ठ भाव के स्वामी के साथ अन्य 11 भावेशों में व्यत्यय सम्बन्ध – जनित 11  योग होगें –
(1) षष्ठेश और लग्नेश में व्यत्यय
(2) षष्ठेश और द्वितीयेश में व्यत्यय
(3) षष्ठेश और तृतीयेश में व्यत्यय
(4) षष्ठेश और चतुर्थेश में व्यत्यय
(5) षष्ठेश और पंचमेश में व्यत्यय
(6) षष्ठेश और सप्तमेश में व्यत्यय
(7) षष्ठेश और अष्टमेश में व्यत्यय
(8) षष्ठेश और नवमेश में व्यत्यय
(9) षष्ठेश और दशमेश में व्यत्यय
(10) षष्ठेश और एकादशेश में व्यत्यय
(11) षष्ठेश और व्ययेश में व्यत्यय
इनकी संख्या 11 है|

अष्टमेश के साथ शेष 10  भावेशो में 10  व्यत्यय सम्बन्ध होते है -  
(1) अष्टमेश और लग्नेश में व्यत्यय,
(2) अष्टमेश और द्वितीयेश में व्यत्यय
(3) अष्टमेश और तृतीयेश में व्यत्यय
(4) अष्टमेश और चतुर्थेश में व्यत्यय
(5) अष्टमेश और पंचमेश में व्यत्यय
(6) अष्टमेश और सप्तमेश में व्यत्यय
(7) अष्टमेश और में नवमेश व्यत्यय
(8) अष्टमेश और दशमेश में व्यत्यय
(9) अष्टमेश और एकादशेश में व्यत्यय
(10) अष्टमेश और व्ययेश में व्यत्यय

इनकी संख्या 10 है|
                      
व्ययेश (द्वादशेश) भाव के स्वामी के साथ अन्य 9  भावेशों (षष्ठेश, अष्टमेश व व्ययेश को छोडकर) से व्यत्यय सम्बन्ध-
(1) व्ययेश और लग्नेश में व्यत्यय
(2) व्ययेश और द्वितीयेश में व्यत्यय
(3) व्ययेश और तृतीयेश में व्यत्यय
(4) व्ययेश और चतुर्थेश में व्यत्यय
(5) व्ययेश और पंचमेश में व्यत्यय  
(6) व्ययेश और सप्तमेश में व्यत्यय
(7) व्ययेश और नवमेश में व्यत्यय
(8) व्ययेश और दशमेश में व्यत्यय
(9) व्ययेश और एकादशेश में व्यत्यय
ये 9 योग होते है|

इसी प्रकार ये कुल 11 + 10 + 9 = 30 योग होते है| इन्हें दैन्य योग कहते है| 
Dainya-Yog
कैसे होते है दैन्य योग में उतपन्न जातक?
दैन्य योग में उतपन्न जातक व्यक्ति मुर्ख होता है|
दैन्य योग में उतपन्न जातक अपवाद युक्त पापकर्मा करने वाले होते है|
दैन्य योग में उतपन्न जातक करूष वाकू होते है|
दैन्य योग में उतपन्न जातक शत्रुओ से पीड़ित होते है|
दैन्य योग में उतपन्न जातक चंचल बुद्धि के होते है|
दैन्य योग में उतपन्न जातक के समस्त कार्य बाधित होते है|

क्यों फलित नही होता है दैन्य योग?
दैन्य योग के प्रमुख कारक षष्ठ या अष्टम या बारहवा भाव का स्वामी व जिसका सम्बन्ध षष्ठ या अष्टम या बारहवा भाव का स्वामी से होगा वही बनेगा तो निम्न कारणों से दैन्य योग अपना पूर्ण फल नही देगा—

यदि षष्ठ या अष्टम या बारहवा भाव का स्वामी ग्रह बालावस्था, वृद्ध अवस्था या मृत अवस्था में हो तो भी जातक को दैन्य योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

षष्ठ या अष्टम या बारहवा भाव के स्वामी से जिस भाव का सम्बन्ध होगा वह ग्रह यदि बालावस्था, वृद्ध अवस्था या मृत अवस्था में हो तो भी जातक को दैन्य योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

षष्ठ या अष्टम या बारहवा भाव के स्वामी के साथ सम्बन्ध बना हुआ यदि षष्ठ भाव या अष्टम भाव या व्यय भाव में हो तो भी जातक को दैन्य योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|


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Tuesday, November 20, 2018

क्या होता है पुष्कल योग? व कैसे होते है पुष्कल योग में उतपन्न जातक? व क्यों फलित नही होता है पुष्कल योग?

क्या होता है पुष्कल योग? व कैसे होते है पुष्कल योग में उतपन्न जातक? व क्यों फलित नही होता है पुष्कल योग?

क्या होता है पुष्कल योग?
यदि लग्नेश और चन्द्र राशि अधिमित्र राशि में अथवा केन्द्र (1, 4, 7, 10 ) में स्थित हो और लग्न पर बलवान शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो पुष्कल योग होता है|
Pushkal-yog

कैसे होते है पुष्कल योग में उतपन्न जातक?
पुष्कल योग में उत्पन्न जातक श्रेष्ठ होते है|
पुष्कल योग में उत्पन्न जातक बहु धनसम्पन्न होते है|
पुष्कल योग में उत्पन्न जातक सुविख्यात होते है|
पुष्कल योग में उत्पन्न जातक सौम्य भाषी होते है|
पुष्कल योग में उत्पन्न जातक गुणवान लीडर होते है|

क्यों फलित नही होता है पुष्कल योग?

यदि लग्नेश और चन्द्र राशि अधिमित्र राशि में अथवा केन्द्र (1, 4, 7, 10 ) में स्थित हो और लग्न पर बलवान शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो पुष्कल योग होता है अब यहा पुष्कल योग के तीन कारक ग्रह बनते है पहला लग्नेश, दूसरा चन्द्र राशि वाला ग्रह और तीसरा लग्न पर जिस बलवान शुभ ग्रह की दृष्टि तो निम्न कारणों से पुष्कल योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा

यदि लग्नेश बालावस्था या वृद्ध अवस्था या मृत अवस्था में हो तो भी जातक को पुष्कल योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

यदि लग्नेश षष्ठ भाव या अष्टम भाव या व्यय भाव का स्वामी हो तो भी जातक को पुष्कल योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

यदि चन्द्र राशि वाला ग्रह बालावस्था या वृद्ध अवस्था या मृत अवस्था में हो तो भी जातक को पुष्कल योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

यदि चन्द्र राशि वाला ग्रह षष्ठ भाव या अष्टम भाव या व्यय भाव का स्वामी हो तो भी जातक को पुष्कल योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

यदि लग्न पर जिस शुभ ग्रह की दृष्टि हो वो बालावस्था या वृद्ध अवस्था या मृत अवस्था में हो तो भी जातक को पुष्कल योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

यदि लग्न पर जिस शुभ ग्रह की दृष्टि हो वो षष्ठ भाव या अष्टम भाव या व्यय भाव का स्वामी हो तो भी जातक को पुष्कल योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|


मै आशा करता हू की आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी| आपको ये जानकारी कैसी लगी इसके बारे में हमें जरुर बताइयेगा| व आगे इसी तरह की ज्योतिष की जानकारी के लिए जुड़े रहिएगा..........

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Monday, November 19, 2018

क्या होता है वसुमत योग? व कैसे होते है वसुमत योग में उतपन्न जातक? व क्यों फलित नही होता है वसुमत योग?

क्या होता है वसुमत योग? व कैसे होते है वसुमत योग में उतपन्न जातक? व क्यों फलित नही होता है वसुमत योग?


क्या होता है वसुमत योग?
यदि लग्न या चन्द्रमा से उपचय भाव ( 3, 6, 10, 11 ) में बलवान शुभ ग्रह हो तो वसुमत योग बनता है|
Vasumat-Yog
कैसे होते है वसुमत योग में उतपन्न जातक?

वसुमत योग में उतपन्न जातक राज्य, बन्धु व जनता का प्रिय होता है|
वसुमत योग में उतपन्न जातक धन-धान्य से सम्पन्न होते है|
वसुमत योग में उतपन्न जातक स्व-स्थान में सदैव निवास करते है|
वसुमत योग में उतपन्न जातक गुणी होते है|


क्यों फलित नही होता है वसुमत योग?
यदि लग्न या चन्द्रमा से उपचय भाव ( 3, 6, 10, 11 ) में बलवान शुभ ग्रह हो तो वसुमत योग बनता है अब यहाँ कारक ग्रहों में लग्नेश या चन्द्रमा व उपचय भाव ( 3, 6, 10, 11 ) में स्थित शुभ ग्रह आता है| अब निम्न कारणों से वसुमत योग अपना पूर्ण फल नही देगा

यदि लग्नेश कमजोर हो या षष्ठ भाव में या अष्टम भाव में या व्यय भाव में हो तो भी वसुमत योग अपना पूर्ण फल नही देगा|

अब देखते है चन्द्रमा किस भाव में है, क्युकि चन्द्रमा से उपचय भाव ( 3, 6, 10, 11 ) में कौन सा भाव आता है यदि चन्द्रमा से उपचय भाव ( 3, 6, 10, 11 ) में - तीसरे भाव में, षष्ठ भाव में, अष्टम भाव में, व्यय भाव में होगा तो भी वसुमत योग अपना पूर्ण फल नही देगा|

यदि चन्द्रमा षष्ठ या अष्टम या व्यय भाव का स्वामी हो तो भी जातक को वसुमत योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

चन्द्रमा पूर्ण बली न हो अर्थात वो कृष्ण पक्ष की षष्टमी तिथि से शुक्ल पक्ष के षष्टमी तिथि के बीच का हो तो भी जातक को वसुमत योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

यदि उपचय भाव ( 3, 6, 10, 11 ) में स्थित ग्रह कमजोर हो या षष्ठ भाव में या अष्टम भाव में या व्यय भाव में हो तो भी वसुमत योग अपना पूर्ण फल नही देगा|
 

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Sunday, November 18, 2018

क्या होता है विरंची योग? व कैसे होते है विरंची योग में उतपन्न जातक? व क्यों फलित नही होता है विरंची योग?

क्या होता है विरंची योग? व कैसे होते है विरंची योग में उतपन्न जातक? व क्यों फलित नही होता है विरंची योग?

क्या होता है विरंची योग?
जब गुरु, सूर्य और पंचमेश अपनी उच्च राशि, स्व-राशि या मित्र राशि से युक्त होकर यदि केन्द्र ( 1, 4, 7, 10 ) या त्रिकोण ( 5, 9 ) भवनों में स्थित हो तो विरंची योग होता है|

Viranchi-Yog
कैसे होते है विरंची योग में उतपन्न जातक?
विरंची योग में उत्पन्न जातक ब्रह्मज्ञानी होते है|
विरंची योग में उत्पन्न जातक अत्यंत बुद्धिमान होते है|
विरंची योग में उत्पन्न जातक वैदिक ज्ञान से परिपूर्ण होते है|
विरंची योग में उत्पन्न जातक गुणवान होते है|
विरंची योग में उत्पन्न जातक प्रसन्नचित होते है|
विरंची योग में उत्पन्न जातक सौम्य भाषी होते है|
विरंची योग में उत्पन्न जातक बहु धनसम्पन्न होते है|
विरंची योग में उत्पन्न जातक ब्रह्म तेज से शोभित होते है|
विरंची योग में उत्पन्न जातक दीर्घायु होते है|
विरंची योग में उत्पन्न जातक इन्द्रजीत होते है|
विरंची योग में उत्पन्न जातक राजाओ द्वारा पूजित होते है|

क्यों फलित नही होता है विरंची योग?

जब गुरु, सूर्य और पंचमेश अपनी उच्च राशि, स्व-राशि या मित्र राशि से युक्त होकर यदि केन्द्र ( 1, 4, 7, 10 ) या त्रिकोण ( 5, 9 ) भवनों में स्थित हो तो विरंची योग होता है अब यहा विरंची योग के तीन कारक ग्रह बनते है पहला गुरु, दूसरा सूर्य और तीसरा पंचमेश तो निम्न कारणों से विरंची योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा

यदि गुरु बालावस्था, वृद्ध अवस्था या मृत अवस्था में हो तो भी जातक को विरंची योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

यदि गुरु षष्ठ भाव या अष्टम भाव या व्यय भाव का स्वामी हो तो भी जातक को विरंची योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

यदि सूर्य बालावस्था, वृद्ध अवस्था या मृत अवस्था में हो तो भी जातक को विरंची योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

यदि सूर्य षष्ठ भाव या अष्टम भाव या व्यय भाव का स्वामी हो तो भी जातक को विरंची योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

यदि पंचमेश बालावस्था, वृद्ध अवस्था या मृत अवस्था में हो तो भी जातक को विरंची योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

यदि पंचमेश षष्ठ भाव या अष्टम भाव या व्यय भाव का स्वामी हो तो भी जातक को विरंची योग कभी अपना पूर्ण फल नही देगा|

मै आशा करता हू की आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी| आपको ये जानकारी कैसी लगी इसके बारे में हमें जरुर बताइयेगा| व आगे इसी तरह की ज्योतिष की जानकारी के लिए जुड़े रहिएगा..........

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